उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में इस साल जंगलों में आग ने गंभीर रूप ले लिया है। अप्रैल के तीसरे सप्ताह तक ही वनाग्नि की घटनाओं ने पिछले साल के आंकड़ों को पीछे छोड़ दिया है, जिससे पर्यावरण और वायु गुणवत्ता दोनों पर खतरा मंडरा रहा है।

वन विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अब तक कुल 145 वनाग्नि की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इनमें से 81 घटनाएं आरक्षित वन क्षेत्रों में और 64 घटनाएं सिविल वनों में दर्ज की गई हैं। इन आग की घटनाओं में लगभग 96.08 हेक्टेयर वन क्षेत्र जलकर प्रभावित हो चुका है।
गढ़वाल मंडल सबसे अधिक प्रभावित नजर आ रहा है, जहां अकेले 110 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इसमें 56 आरक्षित वन और 54 सिविल वन क्षेत्र शामिल हैं। खासतौर पर बदरीनाथ वन प्रभाग में सबसे ज्यादा 41 घटनाएं सामने आई हैं।
वहीं, रुद्रप्रयाग वन प्रभाग में कुल 30 घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 10 आरक्षित और 20 सिविल वन शामिल हैं। यहां करीब 65 हेक्टेयर जंगल आग की चपेट में आ चुके हैं। तुलना करें तो पिछले वर्ष इसी अवधि में यहां केवल 6 घटनाएं ही सामने आई थीं।
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विशेषज्ञों का कहना है कि इन लगातार बढ़ती आग की घटनाओं का असर अब वायु गुणवत्ता पर साफ दिखाई दे रहा है। AQI स्तर चिंताजनक स्थिति में पहुंच रहा है, जबकि हवा में ब्लैक कार्बन की मात्रा बढ़ने से तापमान में भी इजाफा हो रहा है।
