केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यह फैसला देशभर में चल रहे छात्र आंदोलनों और शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सामने आया है। इस्तीफे के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है और विपक्ष इसे छात्रों की जीत बता रहा है।
पिछले कुछ दिनों से विभिन्न छात्र संगठनों द्वारा नीट पेपर लीक और अन्य परीक्षा संबंधी मुद्दों को लेकर लगातार प्रदर्शन किए जा रहे थे। विपक्षी दलों ने भी सरकार पर छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया था। इसी बीच धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद आंदोलन कर रहे छात्र संगठनों ने इसे अपने संघर्ष की बड़ी सफलता बताया है।
कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने कहा कि छात्रों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता और यह इस्तीफा युवाओं के संघर्ष का परिणाम है। वहीं भाजपा की ओर से अभी तक इस्तीफे को लेकर आधिकारिक विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम आने वाले समय में शिक्षा और रोजगार के मुद्दों पर राष्ट्रीय राजनीति को नई दिशा दे सकता है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि केंद्र सरकार शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी किसे सौंपती है और छात्रों की मांगों पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
